मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं विरंचि सम।

Example 1:

मूर्ख आदमी को ब्रह्मा भी नहीं समझा सकते।

Example 2:

गोस्‍वामी तुलसीदासकृत सोरठा की पहली पंक्ति है- "फूलहिं फलहिंन बेंतजदपि सुधा बरसहिं जलद"