मों कौ कौर नाक में नईं जातो रत।

Example 1:

मुँह का कौर नाक में नहीं चला जायगा। प्रकृति-विरुद्ध कोई काम नहीं होता। प्रायः उस समय कहते हैं जब रात्रि के समय किसी को एकाध मिनट के लिए अँधेरे में बैठ कर भोजन करने का मौका आ जाय और वह शिकायत करे कि रोशनी कहाँ गयी।