सदा के दुखी, नाव बखतावर। / सदा न फूलै तोरई, सदा न सावन होय। / सदा न राजा रन चड़े, सदा न जोबन होय।।
Example 1:
सदा दिन एक से नहीं रहते। ये बुन्देलखंड के प्रसिद्ध लोकगीत 'अमानसिंह कौ राछरौ' की प्रारंभिक पंक्तियाँ हैं जो कहावत बन गयी हैं।
Example 2:
सदा न फूले केतकी, सदा न सावन होय।/ सदा न जोबन थिर रहे, सदा न जीबे कोय।