सूई बोलै तो बोलै, चलनी का बोलै, जीमें बहत्तर छेद।
Example 1:
जो स्वयं अवगुणों से भरा है वह भी दूसरों के दोष देखे तो यह हँसी की बात है।
Example 2:
चलनी कहती है कि, सुई तेरे पोंद में छेद क्यों ? परन्तु अपने दोष नहीं देखती जिसके सर्वांग में छेद ही छेद हैं।