चढ़ाये की नाइन।
Example 1:
चढ़ावे के समय की नाइन। विवाह के दिन जब वरपक्ष की ओर से लड़की के लिए चढ़ावा चढ़ने आता है तब नाइन विशेष रूप से सजी-बजी तो नजर आती ही है, पर उसके साथ ही वह बहुत व्यस्त भी रहती है। विवाह संबंधी कार्यों के लिए उसे बार-बार इधर से उधर जाना पड़ता है। अतः कहावत बनी-ठनी स्त्री, अथवा ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त जो किसी का संदेश-वाहक बनकर आये।
Example 2:
ऊधो तुमें दिन केते भये, सुइतै करौ बोध, उतै परौ पाँयन। / उनकी हमसों, हमरी उनसों, जे बातें कहौ कहा जी ललचाइन। / द्वारका वे तो अमीर भये, 'जुगलेश' भई कुंबजा ठकुराइन। / हम तौ मन मार कें बैठीं घरे, बनकें तुम आये चढ़ाये की नाइन।।