चार कलेवा, आठ दुपर कीं, नौ व्यारी की देओ गोपाला। / इतने में कऊँ फेर परै तौ, जा लेओ कंठी, जा लेओ माला।। / चार चुअना1 कौ चौमासो।

Example 1:

(1-छप्पर में हो जाने वाला वह छिद्र जिससे वर्षा का पानी भीतर चुए। वर्षा के पानी का टपकना। 2- नकटयावना नाक कटना, बदनामी होना।) वर्षा ऋतु में यदि छप्पर दो चार जगह से टपकने भी लगे तौ भी वर्षा के चार मास तो किसी न किसी प्रकार बीत ही जाते हैं, इसी प्रकार विवाह में भी यदि किसी बात को लेकर कुछ झंझट या बदनामी हो तो भी विवाह तो होकर ही रहता है और उन बदनामी की बातों को भी लोग शीघ्र भूल जाते हैं। अतः चिन्ता किस बात की ?