चोर चोरी से गओ, तौ का टारा-फेरी सें गओ।
Example 1:
किसी का जन्मजात स्वभाव आसानी से नहीं छूटता।
Example 2:
इसकी एक कथा है कि एक चोर ने कई बार पकड़े जाने और दंड पाने के कारण चोरी करना छोड़ दिया और साधू हो गया। भला साधुओं के पास चोरी करने के लिए क्या रखा था? परन्तु उसे तो अपने मन को शान्त करने के लिए कुछ न कुछ करना था। इसलिए जब सब साधू सो जाते तब वह उनके दंड-कमंडल ही इधर के उधर कर दिया करता। एक दिन साधुओं को पता लग गया कि यही मनुष्य हम लोगों की चीजों को अस्त-व्यस्त कर देता है। जब उससे पूछा गया कि तू ऐसा क्यों करता है तो उसने उत्तर दिया- मैं पहिले चोर था, यद्यपि मैंने चोरी करना छोड़ दिया। परन्तु क्या करूँ, अपनी आदत से लाचार हूँ। चोरी न करूँ, तो क्या टारा-फेरी भी न करूँ ?