डॉ. वी. एम. आप्टे
May 11, 2026
प्रो. रामजी उपाध्याय
May 11, 2026प्रो. बाबूराम सक्सैना
इनका जन्म 14.05.1898 को उ.प्र. के लखीमपुर खीरी जिले के महेवागंज में हुआ। इनके पिता का नाम बाबू पुत्तुलाल जमींदार था जो नेपाल के मूल निवासी थे और कत्थे का व्यापार करते थे। इनकी माता का नाम श्रीमती बुन्नी बाई था। इनके बड़े भाई श्री ब्रह्मदीन सक्सैना म.प्र. के नरसिंहगढ़ जिले में वकालत करते थे। इनकी चार बहिनें थीं। दो बहिनें लखनऊ में एक ही परिवार में विवाहित थीं और शेष दो बहिनें आगरा तथा बरेली में विवाहित थीं। डॉ. सक्सैना उ.प्र. के सम्मानित और उल्लेखनीय सक्सैना दुसारे कायस्थ वंश के थे। इनके परिवार का विशेष नाम अदावाल है। इनके पुत्र अपने उपनाम में सक्सैना के स्थान पर अदावाल ही लिखते हैं। 1903 से इनका अध्ययन गाँव के ही शासकीय प्राथमिक विद्यालय से प्रारम्भ हुआ और 1914 में इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा विद्यालय में सर्वाधिक अंकों के साथ उत्तीर्ण की। 1916 में इण्टर की परीक्षा ईविंग क्रिश्चियन कॉलेज इलाहाबाद से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और मेरिट में चौथा स्थान प्राप्त किया। इसके पश्चात् 1918 में म्योर सेण्ट्रल कॉलेज से स्नातक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1920 में इलाहाबाद वि.वि. से संस्कृत में एम.ए. की उपाधि प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अक्टूबर 1920 में प्रो. गंगानाथ झा के निर्देश पर उच्च शिक्षा हेतु वाराणसी चले गये और वहां शोधछात्र रहकर संस्कृत अलंकार पर प्राचार्य ए.बी. ध्रुव के निर्देशन में शोधकार्य पूर्ण किया। आपने पं. गोपीनाथ कविराज पं. रामावतार शर्मा और पं. दामोदर गोस्वामी से संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की। जनवरी 1921 में बनारस हिन्दू वि.वि. में भाषा विज्ञान के शोधछात्र रहे और भारतीय भाषा विज्ञान के प्रो. आर. एल. टर्नर के निर्देशन में अवधी के विकास पर डी.लिट्. का कार्य पूरा किया। इसके लिए उ.प्र. सरकार ने इन्हें छात्रवृत्ति भी प्रदान की।
इनका विवाह 18.06.1922 को नरसिंहगढ, म.प्र. निवासी गोविन्द प्रसाद वर्मा की पुत्री और हिन्दी साहित्य की प्रख्यात कवि महादेवी वर्मा की बहिन श्यामादेवी के साथ सम्पन्न हुआ। इनकी आठ सन्तान हैं जिनमें एक पुत्र और सात पुत्रियां हैं। पुत्र नवीन कुमार अदावाल चौथी सन्तान हैं। पुत्रियां प्रीतिलता, कीर्तिलता, नीति, दीप्ति, सुमति, प्रभाति, और शक्ति हैं। ये सभी उच्च शिक्ष प्रापत रही हैं। इनमें से कीर्तिलता दत्त सागर वि.वि. के भाषा विज्ञान विभाग में डी.लिट् की शोधछात्रा रही हैं। 19.10. 1922 को इलाहाबाद वि.वि. में संस्कृत के व्याख्याता पद पर डॉ. सक्सैना की नियुक्ति हुई। 1929-1930 तक इन्होंने लन्दन वि.वि. के स्कूल ओरिएण्टल स्टडीज में भारतीय भाषा विज्ञान और संस्कृत के प्रोफेसर टर्नर के निर्देशन में कार्य किया। 18.03.1933 को रीडर के पद पर पदोन्नति हुई।
21.07.1950 को संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति हुई। 1947 से 1952 तक के. पी. कॉलेज में मानसेवी प्राचार्य रहे। 1952 से 1956 तक कला संकाय में अधिष्ठाता के पद पर कार्यरत रहे। 1956 से 1958 तक अधिष्ठाता, छात्र कल्याण पद पर रहे। 30.09.1965 को इलाहाबाद वि.वि. से सेवानिवृत हुए। इलाहाबाद वि.वि. से सेवानिवृत होकर दूसरे दिन 01.10.1959 को सागर वि.वि. के भाषा विज्ञान विभाग में प्रोफेसर तथा अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए और उनके निर्देशन में भाषा तथा बोलियों के पारस्परिक सम्बन्धों पर अनेक शोधकार्य हुए।
संस्कृत विभाग के भी 02 शोधछात्रों का उन्होंने सफल निर्देशन किया। डॉ. सक्सैना ने भारत सरकार की सेवा के लिए 15.11.1961 को सागर वि.वि. छोड़ दिया और दिल्ली प्रस्थान कर गये। 1961 से 1964 तक भारत सरकार के शिक्षा मन्त्रालय ने डॉ. सक्सैना को हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं के वैज्ञानिक एवं तकनीकि शब्दावली आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया। इस पद पर वे 31.05.1964 तक रहे। बाद में एक वर्ष तक अध्यक्ष पद पर रहे। 01.06.1964 को डॉ. सक्सैना पं. रविशंकर वि.वि. रायपुर के प्रथम कुलपति के रूप में नियुक्त हुए और पश्चात् 1970 में ये इलाहाबाद वि.वि. के भी मानद कुलपति रहे। इस प्रकार आप दो विश्वविद्यालयों में कुलपति रहे और सागर तथा रायपुर विश्वविद्यालयों में भाषाविज्ञान विभागों के संस्थापक भी रहे। 1957 में ये लिंग्विस्टिक सोसायटी ऑफ इण्डिया के प्रेसिडेण्ट रहे। और इसी सोसायटी के वे संस्थापक सदस्य भी थे। पेरिस और अमेरिका के वे इसी समिति के आजीवन सदस्य रहे। नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी के वे सदस्य रहे। 1955 में भारत के राष्ट्रपति ने इन्हें राजभाषा आयोग का सदस्य नियुक्त किया। 1952 से 1960 तक भारत सरकार ने डॉ. सक्सैना को विज्ञान और तकनीकि शब्दावली मण्डल में सदस्य नियुक्त किया। चार वर्षों तक आप साहित्य अकादमी के महत्त्वपूर्ण तथा प्रभावशाली सदस्य रहे।
1959 में जर्मन सरकार के विशेष आमंत्रण पर भारत के शिक्षा विद् के रूप में अपना प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त भी आप अनेक संस्थाओं के सदस्य तथा अध्यक्ष रहे। 1943 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा सामान्य भाषा विज्ञान नामक ग्रन्थ प्रकाशित हुआ। 1961 में पटना वि.वि. से अर्थविज्ञान, 1938 में इण्डियन प्रेस, इलाहाबाद से एवेल्युशन ऑफ अवधी तथा हिन्दुस्तानी अकादमी, इलाहाबाद से अवधी का विकास नामक ग्रन्थ प्रकाशित हुआ। इसके अतिरिक्त इनके अनेक लेख, अनेक अनुवाद तथा माधवी और सुधा जैसी प्रसिद्ध पत्रिकाओं के प्रकाशन में इनका विशेष सहयोग रहा। डॉ. सक्सैना निर्भीक तथा स्पष्टवादी अधिकारी थे। हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन और प्राकृतं भाषाओं के ये ज्ञाता थे। राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति ये समर्पित रहे और निरंतर हिन्दी की सेवा करते रहे। भाषा विज्ञान के उन्नयन के लिए इन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण कार्य किये। 13.07.1988 को इलाहाबाद में इस महान् शिक्षाविद् ने अंतिम सांस ली।
सम्पर्क – (1) श्रीमती प्रभाती वर्मा, 253, जयमाँ अपार्टमेण्ट, प्लॉट नं. 16, सैक्टर-5, द्वारका, नई दिल्ली-75, दूरभाष – 011 25072511
(2) डॉ. सुमति सक्सैना, हाउस नं. 407, बैजनाथ रोड, न्यू हैदराबाद, लखनऊ (उ.प्र.), मो. – 9936077799





