आपने अनुभव किया होगा कि कभी बहुत अधिक गर्मी लगती है तथा कभी ठंड। यह इसलिए होता है कि साल के विभिन्न महीनों में वायुमण्डल की दशा भिन्न-भिन्न प्रकार की होती है। किसी स्थान के विभिन्न समय के मौसम का अध्ययन करके ही उस स्थान की जलवायु को जाना जा सकता है। पूरे वर्ष भर मौसम की जो स्थिति रहती है उसे ‘जलवायु’ कहते है।
ऋतु
जितने समय तक जलवायु की एक सी दशा रहती है उसे एक ऋतु कहते है। ललितपुर जनपद की जलवायु में मुख्यत: तीन ऋतुएँ होती है। यें हैं – ग्रीष्म या गर्मी (मार्च से जून तक), वर्षा (जुलाई से अक्टूबर तक) एवं ठंड या जाड़ा (नवम्बर से फरवरी तक)
ग्रीष्म ऋतु – मार्च माह से ही गर्मी बढ़नी प्रारम्भ हो जाती है तथा मई तथा जून माह सबसे गर्म होता है, इस समय दिन में अधिक गर्मी पड़ती है तथा गर्म हवाएँ चलती है, जिनको ‘लपट’ या ‘लू’ कहते है। इस समय दिन में घर से निकलना कठिन हो जाता है। इस समय जनपद में दिन का अधिकतम तापमान 480 सेल्सियस तथा न्यूनतम 290 सेल्सियस रहता है। वर्षा होने पर गर्मी कुछ कम हो जाती है।
वर्षा ऋतु- जून के अन्त में बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं से यहाँ साधारण वर्षा होती है। वर्ष भर में जनपद में औसत वर्षा 70-80 सेन्टीमीटर के लगभग होती है। यहाँ जुलाई अगस्त माह में सबसे अधिक वर्षा होती है।
जाड़े की ऋतु – दिसम्बर और जनवरी माह में रात्रि में अधिक ठंड़ पड़ती है तथा कभी-कभी दिन में शीत लहर भी चलती है। बच्चों इस समय आप गर्म कपड़े पहनते हो और तापने के लिए आग भी जलाते है। इस समय यहाँ पर औसत दैनिक अधिकतम तापमान 240 सेल्सियस व न्यूनतम 50 से 70 सेल्सियस के मध्य रहता है। इस ऋतु में कभी-कभी कुछ वर्षा भी हो जाती है, जो रवी की फसल के लिए लाभदायक होती है। इस वर्षा को माहुठ कहते हैं। कभी-कभी अधिक ठंड पड़ने से ‘पाला’ भी पड़ जाता है जिससे इस मौसम की फसलों को हानि भी होती है।
आपने बुन्देली कहावतों का भाषा वैज्ञानिक एवं समाजशास्त्रीय अनुशीलन कर मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के सेवासदन महाविद्यालय बुरहानपुर मप्र में विभागाध्यक्ष के रुप में पदस्थ रहे।
बुन्देली धरती के सपूत डॉ वीरेन्द्र कुमार निर्झर जी मूलतः महोबा के निवासी हैं। आपने बुन्देली कहावतों का भाषा वैज्ञानिक एवं समाजशास्त्रीय अनुशीलन कर मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के सेवासदन महाविद्यालय बुरहानपुर मप्र में विभागाध्यक्ष के रुप में पदस्थ रहे। अखिल भारतीय साहित्य परिषद मालवा प्रांत, हिन्दी मंच,मध्यप्रदेश लेखक संघ जिला बुरहानपुर इकाई जैसी अनेक संस्थाओं के अध्यक्ष रहे। आपके नवगीत संग्रह -ओठों पर लगे पहले, सपने हाशियों पर,विप्लव के पल -काव्यसंग्रह, संघर्षों की धूप,ठमक रही चौपाल -दोहा संग्रह, वार्ता के वातायन वार्ता संकलन सहित अनेक पुस्तकों का सम्पादन कार्य किया है। आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से कहानी, कविता,रूपक, वार्ताएं प्रसारित हुई। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक लेख प्रकाशित हैं। अनेक मंचों से, संस्थाओं से राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया है। वर्तमान में डॉ जाकिर हुसैन ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट बुरहानपुर में निदेशक के रूप में सेवायें दे रहे हैं।
डॉ. उषा मिश्र
सेवा निवृत वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी केमिस्ट्री और टॉक्सिकोलॉजी गृह विभाग, मध्यप्रदेश शासन।
नाम – डा. उषा मिश्रा पिता – डा.आर.सी अवस्थी पति – स्व. अशोक मिश्रा वर्तमान / स्थाई पता – 21, कैंट, कैंट पोस्ट ऑफिस के सामने, माल रोड, सागर, मध्य प्रदेश मो.न. – 9827368244 ई मेल – usha.mishra.1953@gmail.com व्यवसाय – सेवा निवृत वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी ( केमिस्ट्री और टॉक्सिकोलॉजी ) गृह विभाग, मध्यप्रदेश शासन। शैक्षणिक योग्यता – एम. एससी , पीएच. डी. शासकीय सेवा में रहते हुए राष्ट्रीय – अंतराष्ट्रीय कान्फ्रेंस में शोध पत्र की प्रस्तुति , मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर, गृह विभाग द्वारा आयोजित वर्क शॉप, सेमिनार और गोष्ठीयों में सार्थक उपस्थिति , पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज सागर में आई. पी. एस., डी. एस. पी. एवं अन्य प्रशिक्षणु को विषय सम्बन्धी व्याख्यान दिए।
सेवा निवृति उपरांत कविता एवं लेखन कार्य में उन्मुख, जो कई पत्रिकाओं में प्रकाशित। भारतीय शिक्षा मंडल महाकौशल प्रान्त से जुड़कर यथा संभव सामजिक चेतना जागरण कार्य हेतु प्रयास रत।